Friday, 24 January 2014

समकालीन कविता के बीच व्यापक पारिवारिक समानता है

केदारनाथ सिंह से अभिज्ञात की बातचीत

साभार :जनसत्ता व मेरे साक्षात्कार, किताबघर प्रकाशन, 2008
पृष्ठ 48 से पृष्ठ 55 तक

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